दिलों का बाज़ार लगा था
नीलामी की अर्जी हमने भी लगा दी
हजारो लाखो की भीड़ में ,
दुकान हमने भी सजा डाली
सुबह के बैठे थे , शाम हो आई
पर कोई खरीददार नहीं मिला
कम कुछ हम भी कहाँ
एक बार फिर बोली लगा डाली
कमबख्त रात हो आई .
अब कुछ किरायेदार बचे थे
वो भी किराया कम दे रहे थे
दिल का हमारे मोल भाव कर रहे थे
दोष न जाने इस दिल का था
या कमी हमारी दूकान में थी
पर क्या करे दिल तो बेचना ही था
प्यार की कुछ किश्ते जो चुकानी थी
पर ये दिल न बिका
न जाने इसे कोई क्यूँ न मिला
ये टूटा दिल खुद से बोला
घबराता क्यूँ है मुसाफिर
अगले साल फिर चले आना
ये बाज़ार तो हर साल लगता है ..

Yeh jaleem duniya nhi hai kaabil tere dil ki,
ReplyDeleteusme chuppi hai kalakari duniya bhar ki,
koshish na kar ae dost tu use bhecne ki,
is duniya ki aukad nhi hai use tolne ki !!!
@ gaurav ..diye ho ... :)
Delete:) write more ..hum fir aur jyaada denge ;)
ReplyDeleteYeh Bazar Toh Har Saal Lagta Hai😍🙏🙏
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