Wednesday, September 29, 2010

बस एक वो बटवारा ना हुआ होता.....

बस वो एक बटवारा ना हुआ होता ,
वो ज़मीं का नहीं ,राजनीती का नहीं
वो बटवारा था दो दिलो का
कितनी कोशिशें की इन दिलो को जोड़ने की
पर हर कोशिश कामयाब नहीं होती


एक निर्णय ठीक ले लिया होता
तो आज पाकिस्तान बना ही ना होता
वो हजारो लाखो लोगो को बेवजह
मौत के घाट ना उतरना पड़ता


वो बाबरी मस्जिद ना टूटा होता
तो शायद कोई दाउद ना पैदा होता
वो बॉम्बे ब्लास्ट ना होता
वो निन्यानवे का युद्ध ना हुआ होता
कोई जवान शहीद ना होता .
किसी का सुहाग ना लुटा होता
किसी की गोद ना सूनी होती ,कोई यतीम ना होता


काश के लोग प्यार को समझते
अमन और शांति की दुआ करते
कहते है की खुदा हमारे साथ होता है
हर वक़्त हमारे आस पास रहता है
तो ऐ खुदा ..कहा था उस वक़्त जब
जब जल रहे थे घर ,जल रहे थे दो मुल्क
क्यों ना तुने उन चीखो को ना सुना
क्यों तू इतना पत्थर दिल हुआ




कहते है की हर काम के पीछे
खुदा की कोई वजह होती है ..

यदि ये सच है तो ऐ खुदा मुझे जवाब दे
क्या वजह थी उस बटवारे की ,उन दंगो की
उस जंग की जो तेरे अपने बन्दों के बीच हुई
उसकी कोई वजह थी या बस तेरी मरज़ी थी

माना की तेरी मरज़ी के आगे कुछ नहीं होता
पर बस वो एक बटवारा रोक दिया होता


वो बटवारा रुक गया होता
तो कश्मीर आज भी दूसरी जन्नत होता
क्यों उस जन्नत को जहन्नुम बनाया
क्यों कुछ शैतानो को यहाँ भेज दिया
भेज सकता है तो कुछ फ़रिश्ते भेज यहाँ
कर सकता है तो कर इन सीमाओं का अंत
और लौटा दे ऐ खुदा वो अमन और चैन
लौटा दे ..

Wednesday, September 22, 2010

कुछ लफ्ज़ .........टूटे हुए दिल के

काश के ये दिल ना होता
कम से कम चोरी तो ना होता
ना करते हम प्यार किसी से
ना मरते हम यूँ किसी पे

ये दो आँखें ना होती
तो उनसे नज़रें ना मिली होती
ना होता प्यार पहली नज़र में
ना रातो की नींद खोयी होती

काश के हम इतने मज़बूत ना होते
वो इकरार करने की हिम्मत तो ना होती

ना होता कमबख्त ये प्यार ,ना टूटते हमारे प्यारे सपने
ना दिल हमारा टूटा होता, ना उनकी याद हमे आती

पर क्या करे ये ज़िन्दगी भी
इसे सब कुछ जो मिला
ये दिल भी है लेकिन ज़रा टूट गया है
आँखें भी है..लेकिन नज़रें कही खो गयी है

कहने को थोड़ी हिम्मत भी बची है अभी
जो इस जिंदगी को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगी है ...