दिखती है जीतनी, उतनी बड़ी नहीं होती ये जिंदगी
रह जाती है दिल की , कई ख्वाहिशें अधूरी
ये वक़्त गुज़र जाता है
यहाँ यु ही चलते चलते
पर दायरे में इस वक़्त के,
रह जाती है दिल की, कई ख्वाहिशें अधूरी
मंजिलें तो बहुत दिखाती है,ये ज़िन्दगी
पर रास्ते उन मंजिलो के
छुपा लेती है ये ज़िन्दगी
तलाश में उन रास्तो की
ज़िन्दगी हो जाती है पूरी
रह जाती है तो सिर्फ कई ख्वाहिशें अधूरी
Sunday, November 14, 2010
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