Friday, April 30, 2010

हम रहते है ऐसे देश में .............जहाँ तरक्की से पहले सुधार की जरुरत है |

आज के युग में हर दिल में तरक्की की चाह है ….और ये चाह लालच बनने लगी हैआज हर आदमी तरक्की को पाने के लिएसाम दाम दंड भेद’ की नीति अपनाने लगा हैआज हर आदमी बड़ा बनने का सपना देखता है ... क्या होता है ये बड़ा बनना ..जबरदस्ती राजनीती मे आना ?? 'MNC मे जॉब मिलने की चाह मे इंजिनियर बन जाना ?? या फ़िल्मी दुनिया मे एक सुपर स्टार बनने के लिए बस भेडचाल मे ऐसे ही मुंबई जाना ..??....क्या आपको भी लगता है की बड़ा बनना यही होता है

पुरानी कहावत है कीआदमी का काम बड़ा होता है नाम नहीं” ….और सबसे जरुरी है सुधार आपकी सफलता उस बात पे भी निर्भर करती है की आप अपने आस पास की चीजों का किस तरह निरिक्षण करते हैहम तरक्की का पीछा करते करते अपनी कमियों मे सुधार लाना भूल जाते है

आज मैंने कहीं कुछ ऐसा पढ़ाजिसने मुझे ये लिखने पे मजबूर किया

हम एक ऐसे देश मे रहते है ..

जहाँ पिज्जा , अम्बुलेंस और पुलिस से पहले पहुचते है .. जहाँ कार लोन 5% पे मिलता है जबकि 'education loan ' 12% पे मिलता हैजहा चावल के भाव 40 है पर सिम कार्ड के ‘free offers’ आते है ….

जहाँ करोडपति अपनेबड़ेनाम के लिए क्रिकेट टीम खरीदते है ,पर कोई ‘NGO’ और charities मे दान नहीं देता ये सोच कर की शायद उसका नाम कही इसबड़े नाम की रेसमे थोडा छोटा ना पड जाये

हम ऐसे देश मे रहते है ….

जहाँ उसके राष्ट्रीय खेल हाकी टीम किसी ‘tournament’ के जीतने के बाद भी ऑटो -रिक्शा से घर लौटती हैया आप से पूछा जाए की इंडिया कितने हाकी फ़ाइनल खेला है तो शायद आप सोच मे पड जाये ..या google ,yahoo के भरोसे बैठ जाये

हम रहते है ऐसे देश मे…

जहाँ 70% लोग कृषि करके जीवन यापन करते हैऔर सारी ‘facilities’ 30 % जनता को ही मुहय्या करायी जाती है ……हम रहते है ऐसे देश मे…. जहाँ कानून बनने से पहले ही तोड़ दिए जाते है जहाँ असंख्य लोगो को राष्ट्रगान के बोल नहीं आते और आज भी अपना नाम तक लिखना नहीं आता ….

हम रहते है ऐसे देश मे …..

जहाँ किसी ‘tea stall’ पे लोग ‘ child labour’ पे लेख पढ़ के बोलते हैयार इन बच्चो से काम करवाने वालो को तो फ़ासी पे चढ़ा देना चाहिए”और फिर जोर से चिल्लाते है , “ छोटू दो चाय ला यार मलाई मार के ……….”|

हमारा देश अभी विकासशील देश है , हम आशा तो करते है की हम विकसित देशो की गिनती मे आयें पर हम यहाँ कोई विकास करते नहीं है ..और अंत मे बोल देते हैअरे यार नेता लोगो ने देश की वाट लगा रखी है ,कुछ नहीं करते हम क्यों नहीं समझतेकि कोई एक अकेला नेता या व्यक्ति भगवान् बनके इस देश का भला नहीं करेगाहमे खुद अपने आसपास की कमियों को सुधारना होगा ,हर आदमी स्वयं के साथ साथ आसपास की चीजों का सुधार करे तो शायद हम इस लोकतंत्र को सफल बना पाएंगेनहीं तो सिर्फ कहते रह जायेंगेयार ‘USA' जैसी शाषण प्रणाली होनी चाहिए ..राष्ट्रपति शाषण होना चाहिए ”……

आज हमे आज़ादी मिले 63 साल हो गए हैऔर ‘USA’ बने हुए 234 साल …….63 साल कम नहीं होते विकास करने के लिए और विकास हुआ भी है ..पर फिर भी अभी बहुत ऐसी कामिया है जिन्हें कोई अकेला आदमी नहीं सुधार सकता ..हम सबको उचित सुधार का हिस्सा बनना पड़ेगा तभी होगी तरक्की ….इतना मुश्किल नहीं होता है अपनी कमियों को सुधारना ..बस एक शुरुआत की जरुरत है, बस एक रोशनी की किरण की आवश्यकता है , “ रास्ते तो मिल जाते है ,बस उनपे चलना है हमें" …

क्या आपको नहीं लगता की तरक्की से पहले उचित सुधारो की आवश्यकता है …??

अंधे होकर तरक्की के पीछे मत भागो ..चीज़ो को सुधारने की कोशिश करो तरक्की झक मार के तुम्हारे कदम चूमेगी ………….