आज के युग में हर दिल में तरक्की की चाह है ….और ये चाह लालच बनने लगी है …आज हर आदमी तरक्की को पाने के लिए ‘ साम दाम दंड भेद’ की नीति अपनाने लगा है … आज हर आदमी बड़ा बनने का सपना देखता है ... क्या होता है ये बड़ा बनना ..जबरदस्ती राजनीती मे आना ?? 'MNC मे जॉब मिलने की चाह मे इंजिनियर बन जाना ?? या फ़िल्मी दुनिया मे एक सुपर स्टार बनने के लिए बस भेडचाल मे ऐसे ही मुंबई आ जाना ..??....क्या आपको भी लगता है की बड़ा बनना यही होता है …
पुरानी कहावत है की “ आदमी का काम बड़ा होता है नाम नहीं” ….और सबसे जरुरी है सुधार आपकी सफलता उस बात पे भी निर्भर करती है की आप अपने आस पास की चीजों का किस तरह निरिक्षण करते है …हम तरक्की का पीछा करते करते अपनी कमियों मे सुधार लाना भूल जाते है …
आज मैंने कहीं कुछ ऐसा पढ़ा …जिसने मुझे ये लिखने पे मजबूर किया …
“ हम एक ऐसे देश मे रहते है ..
जहाँ पिज्जा , अम्बुलेंस और पुलिस से पहले पहुचते है .. जहाँ कार लोन 5% पे मिलता है जबकि 'education loan ' 12% पे मिलता है …जहा चावल के भाव 40 है पर सिम कार्ड के ‘free offers’ आते है ….
जहाँ करोडपति अपने ‘बड़े ’ नाम के लिए क्रिकेट टीम खरीदते है ,पर कोई ‘NGO’ और charities मे दान नहीं देता ये सोच कर की शायद उसका नाम कही इस ‘बड़े नाम की रेस’ मे थोडा छोटा ना पड जाये …
हम ऐसे देश मे रहते है ….
जहाँ उसके राष्ट्रीय खेल हाकी टीम किसी ‘tournament’ के जीतने के बाद भी ऑटो -रिक्शा से घर लौटती है …या आप से पूछा जाए की इंडिया कितने हाकी फ़ाइनल खेला है तो शायद आप सोच मे पड जाये ..या google ,yahoo के भरोसे बैठ जाये …
हम रहते है ऐसे देश मे…
जहाँ 70% लोग कृषि करके जीवन यापन करते है …और सारी ‘facilities’ 30 % जनता को ही मुहय्या करायी जाती है ……हम रहते है ऐसे देश मे…. जहाँ कानून बनने से पहले ही तोड़ दिए जाते है … जहाँ असंख्य लोगो को राष्ट्रगान के बोल नहीं आते और आज भी अपना नाम तक लिखना नहीं आता ….
हम रहते है ऐसे देश मे …..
जहाँ किसी ‘tea stall’ पे लोग ‘ child labour’ पे लेख पढ़ के बोलते है “ यार इन बच्चो से काम करवाने वालो को तो फ़ासी पे चढ़ा देना चाहिए” …और फिर जोर से चिल्लाते है , “ ऐ छोटू दो चाय ला यार मलाई मार के ……….”|
हमारा देश अभी विकासशील देश है , हम आशा तो करते है की हम विकसित देशो की गिनती मे आयें पर हम यहाँ कोई विकास करते नहीं है ..और अंत मे बोल देते है “अरे यार नेता लोगो ने देश की वाट लगा रखी है ,कुछ नहीं करते” हम क्यों नहीं समझते … कि कोई एक अकेला नेता या व्यक्ति भगवान् बनके इस देश का भला नहीं करेगा …हमे खुद अपने आसपास की कमियों को सुधारना होगा ,हर आदमी स्वयं के साथ साथ आसपास की चीजों का सुधार करे तो शायद हम इस लोकतंत्र को सफल बना पाएंगे …नहीं तो सिर्फ कहते रह जायेंगे “यार ‘USA' जैसी शाषण प्रणाली होनी चाहिए ..राष्ट्रपति शाषण होना चाहिए ”……
आज हमे आज़ादी मिले 63 साल हो गए है …और ‘USA’ बने हुए 234 साल …….63 साल कम नहीं होते विकास करने के लिए और विकास हुआ भी है ..पर फिर भी अभी बहुत ऐसी कामिया है जिन्हें कोई अकेला आदमी नहीं सुधार सकता ..हम सबको उचित सुधार का हिस्सा बनना पड़ेगा तभी होगी तरक्की ….इतना मुश्किल नहीं होता है अपनी कमियों को सुधारना ..बस एक शुरुआत की जरुरत है, बस एक रोशनी की किरण की आवश्यकता है , “ रास्ते तो मिल जाते है ,बस उनपे चलना है हमें" …
क्या आपको नहीं लगता की तरक्की से पहले उचित सुधारो की आवश्यकता है …??
अंधे होकर तरक्की के पीछे मत भागो ..चीज़ो को सुधारने की कोशिश करो तरक्की झक मार के तुम्हारे कदम चूमेगी ………….

jituFIED
ReplyDelete:)....nice language.
ReplyDeletesahi hai be....etna kabh se soche laga tu?
ReplyDeletehmm..i'd say - "dis topic really makes us think..".jitu ; u'v xpressed yo ideas in a very simple n clear way.well done..!! :) Ummm...BTW some "stolen" oops "inspired" lines 4m "3-idiots" wer awesome :P ;) :) - bimla
ReplyDeletebahoot dino baad dil ki likhi hai.
ReplyDeletekaphi achha likha hua hai.....kisi ne thik hi kaha hai ki agar har aadmi apne aap ko change kar le to desh change ho sakta hai aur sach mein usi change ki jarurt hai.......sham ek bar rum pe aana tere se kuch bate karni hai :P
ReplyDelete,,,nice lines..keep writing
ReplyDeletethought provoking
ReplyDelete"हर आदमी स्वयं के साथ साथ आसपास की चीजों का सुधार करे तो शायद हम इस लोकतंत्र को सफल बना पाएंगे"
ReplyDeleteThis is the most appealing lines i felt, although whole script made me ur fan, once again...!!
send this article to some journal, its worth getting published... India need to read this...
ReplyDeleteya i completely agree wid Gazal ....kuch saalo baad hamein jitu ke editorials dainik jagaran dainik bhaskar vagera mein padhne milenge .... it will be the first time i guess a filmstar will write editorials
ReplyDeleteand newspaper ko toh bhej hi sakta hai ...pakka bhej dena ....
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