यूँ है की बस परछाई साथ है
अँधेरा होते होते वो भी छोड़ जाती है
लगता है दो वक़्त की रोटी के लिए
कहीं ज्यादा दूर निकल आये हैं
डेढ़ रोज़ हो चले हैं न अपनों से बात कोई
ना दुश्मनों से मुलाकात कोई ..
अँधेरा होते होते वो भी छोड़ जाती है
लगता है दो वक़्त की रोटी के लिए
कहीं ज्यादा दूर निकल आये हैं
डेढ़ रोज़ हो चले हैं न अपनों से बात कोई
ना दुश्मनों से मुलाकात कोई ..

Are Waah Bhai Yeh Kaafi Kaam Ki Hai Strugglers Ke Lite❤️😍😍
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