Tuesday, November 8, 2011

मैं ना मिला...

खो गया हूँ खुद की तलाश में

किस नुक्कड़ बैठा, किस गली भटका

भरी धुप में दूर तक चला मैं

ताड़ा हर कोना , इंतज़ार भी किया मैंने

पर मैं ना मिला

धोखा मिला

दुःख से भी मुलाकात हुई

चलती फिरती मुस्कुराहटें मिली

धुंधली सी मंजिल की कई राहें भी मिली

सुख दूर से देख के चला गया

गम का तो क्या ज़िक्र करूँ

वो तो आया चीर के निकल गया

दर्द से दोस्ती हुई

दर्द ने चलना सीखाया

खुशियों से मेल कराया

फिर दर्द रहा चला गया कहीं

अब खुशिया थी ,जो ताने मारती थी

एक दिन आया वो भी चली गयी

साथी सब चले गए

हाथ खाली रह गए

कदम रुके थे उस जगह अभी

चले थे जहाँ से कभी

तलाश थी किसी एक की

ज़िन्दगी ने बहुत से मिलाया

सब कुछ मिला

मैं ना मिला ..मैं ना मिला

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