Friday, January 7, 2011

यूँ इस तरह....

बिखरे बिखरे यूँ टूटे हुए पत्तो की तरह
ठहरे ठहरे से यु तन्हा तन्हा ….
डगमगाते कदम थिरकते न जाने कहा
खोये खोये उड़ते हुए बादलो की तरह
सहमे सहमे से यु आहट की तरह

चांदनी रातो में पेड़ो की छांव से
गुजरते तूफानों , गरजते बदलो की तरह
कड़ी धुप में कछुवे की तरह
भीगी बारिस में नाचते हुए मोर की तरह

बेवक्त निकले सतरंगी इन्द्र धनुष से
चमकते रंग बिरंगे रंगों की तरह
कभी तीखी तो कभी धुंधली नजरो से
मंजिल की ओर बढ़ते घोड़ो की रेस की तरह
घडी की दौड़ती तीन सुइयों की तरह

यूँ वक़्त के बराबर चलने की होड़ में
कभी डूबते कभी उगते सूरज की तरह
इन भागती सुइयों को थामने की चाह
जैसे माँ के ओर बढ़ते पहले कदमो की तरह
कभी रूकती कभी गिर के संभलती हुई चींटी की तरह
अँधेरे को चीरती रोशनी की तरह
मंजिल को तराशती कश्ती की तरह
किसी स्टेशन को छोडती रेल गाडी की तरह
कभी जैसे डर में धड़कती दिल की तेज़ धड़कन की तरह
पानी को ढूंढते प्यासे कौवे की तरह
ये ज़िन्दगी भी बिना थमे कदमो की तरह
न जाने किस ओर बस चले जा रही है …….

12 comments:

  1. hats off to u....
    this is lovely....lines are awesome
    you are growing as artist day by day.. :)

    great work.

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  2. awesome work
    machau hai bhai :)

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  3. kya dynamism hain jivan ka
    rukhthi nahin lekin chali jaarahin hain
    nice metaphors buddyyyy

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  4. is it all written by yo own??? i really wonder..!!awesome just awesome.. :o
    -bimzyy :)

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  5. ab tak ki best h bhai jeetu............machana will be an underated word for this....maan gaye dost...kya talent h...kuch lines to seedhe dil ko bas choo gayi....

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  6. jitu, aapki zindagi to bas ek machau lekhak ki oor chale jaa rahi hai!!........ needn't wry!!
    itzzz AWESUM!!! :):):)

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  7. seriously good yaar.....mast hai bhai

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